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Monday, 24 June 2013

कुत्ते की सेलरी 50 हजार

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कुत्ते की सेलरी 50 हजार

अमृतसर । कुत्ते की सेलरी पचास हजार। आने-जाने के लिए एसी गाडि़यां, रहने के लिए वातनुकूलित मकान और सुरक्षा में 24 घंटे तैनात होंगे चार बॉडी गार्ड। विश्वास नहीं हुआ ना..सोच रहे होंगे देश भर में लाखों युवा डिग्रियां लिए नौकरी के लिए लाइनों खड़ा है। ग्रेजुएशन के बाद भी पांच से दस हजार की नौकरी के लिए ठोंकरें खाने पड़ रही हैं और कुत्ते को इतनी सेलरी..।

आश्चर्यचकित न हों ये सच है। ये वो दो कुत्ते हैं जिन्हें सीमा शुल्क विभाग (कस्टम) सीमा पर पाकिस्तानी तस्करों से निपटने के लिए ला रहा है।

इन कुत्तों के लिए अमृतसर के सबसे पॉश इलाके लारेंस रोड स्थित कस्टम कालोनी में वातनुकूलित रूम नंबर डी- अलाट किया गया है। अंतरराष्ट्रीय अटारी बार्डर पर भी आराम फरमाने के लिए एसी रूम आरक्षित किया गया है।

सीमा शुल्क विभाग (कस्टम) के पास ये दोनों कुत्ते रविवार को ग्वालियर से अमृतसर पहुंच रहे हैं। जर्मन शेफर्ड नस्ल के इन कुत्तों की उम्र तीन से चार साल के बीच है। ग्वालियर के टीकमपुर में बीएसएफ के ट्रेनिंग सेंटर में इन स्पेशल दो कुत्तों को ट्रेनिंग दिलाई गई है। इन कुत्तों की परवरिश कैसे करनी है, कुत्तों से कैसे घुल मिलकर रहना है, कुत्ते पसंद व नापसंद का इजहार (प्रगटावा) किस प्रकार करते हैं, यह स्पेशल ट्रेनिंग प्राप्त कुत्ते किस तरह से नशीले पदार्थो की गंध पाते ही कैसे इशारे करके बताते हैं। इन तमाम बातों को जानने के लिए दो ट्रेनरों को डेढ़ महीने तक स्पेशल ट्रेनिंग दी गई। इन कुत्तों के लिए फैमिली डाक्टर के रूप में दो डाक्टरों की टीम भी लगाई गई है। रविवार को ये कुत्ते ग्वालियर से दिल्ली पहुंचेगे और वहां से अमृतसर जहाज से आएंगे। दोनों कुत्तों को पाकिस्तानी नशा तस्करों पर लगाम कसने के लिए स्पेशल ट्रेनिंग दिलाई गई है। नशीले पदार्थो की गंध ये कुत्ते दो सौ मीटर से सूंघने की काबिलियत रखते हैं। इसी तरह विस्फोटक पदार्थ की गंध भी ये कुत्ते बहुत जल्दी सूंघ लेते हैं। इन कुत्तों को विभाग में एक रैंक से जाना जाएगा। यह रैंक एंटी स्मगलिंग एंड एंटी नारकोटिक्स सेल के इन्वेस्टीगेशन के एक हिस्से के बराबर होगा। कुत्तों की सेलरी 50-50 हजार है, हालांकि यही पैसा इन कुत्तों पर खर्च किया जाएगा। सीमा शुल्क विभाग के डिप्टी कमिश्नर वीबी सिंह कहते हैं कि दोनों कुत्तों में से एक को अंतरराष्ट्रीय अटारी बार्डर एवं अटारी रेलवे स्टेशन, इंटेग्रेटिड चेक पोस्ट, तो दूसरे कुत्ते की जिम्मेदारी अमृतसर रेल कारगो, अंतरराष्ट्रीय श्री गुरु रामदास जी हवाई अड्डे पर तैनात किया जाएगा। इनकी देखभाल यानि की खातिरदारी के लिए दो ट्रेनर समेत चार स्टाफ मेंबर भी 24 घंटे हाजिर होंगे।

Saturday, 22 June 2013

स्वामी जी के प्रवचन बड़े ही तर्कसंगत व प्रेरणादायी होते

अध्ययन समाप्त करने के बाद स्वामी चिन्मयानंद जी के मन मे लोक सेवा करने का विचार प्रबल होने लगा। तपोवन जी से स्वीकृति पाकर वे दक्षिण भारत की ओर चले और पूना पहुंचे। वहां उन्होंने अपना प्रथम ज्ञान यज्ञ किया। यह एक प्रकार का नया प्रयोग था।

प्रारम्भ में श्रोताओं की संख्या चार या छह ही था। वह धीरे धीरे बढ़ने लगी। लगभग एक महीने के ज्ञान यज्ञ के बाद वे मद्रास चले गये और वहां दूसरा ज्ञान यज्ञ प्रारम्भ किया। इन यज्ञों में स्वामी चिन्मयानंद जी स्वयं प्रचार करते थे और स्वयं यज्ञ करते थे। कुछ समय बाद ही उनके सहायक तैयार हुए और फिर उसने एक संस्था का रुप ले लिया। धीरे - धीरे उनके प्रवचनों की मांग बढ़ने लगी। स्वामी जी के प्रवचन बड़े ही तर्कसंगत व प्रेरणादायी होते थे।

स्वामी जी ने भी ज्ञान - यज्ञ का समय एक महीने से घटाकर पंद्रह दिन या फिर और फिर दस दिन या सात दिन कर दिया।

पहले ये ज्ञान-यज्ञ भारत के बड़े शहरों में हुए, फिर छोटे शहरों में। कुछ समय बाद स्वामी जी विदेश भी जाने लगे। अब इन यज्ञों की इतनी अधिक मांग हुई कि उसे एक व्यक्ति द्वारा पूरा करना असम्भव हो गया। इसलिए स्वामी जी ने बंबई सान्दीपनी की स्थापना की और ब्रह्मचारियों को प्रशिक्षित करना प्रारम्भ किया। दो तीन वर्ष पढ़ने के बाद ब्रह्मचारी छोटे यज्ञ करने लगे, स्वाध्याय मंडल चलाने लगे और अनेक प्रकार के सेवा कार्य करने लगे।

इस समय देश में 175 केन्द्र और विदेशों में लगभग 40 केन्द्र कार्य कर रहे है। इन केन्द्रों पर लगभग 150 स्वामी एवं ब्रह्मचारी कार्य में लगे है। यह संख्या हर वर्ष बढ़ रही है

धन कमाने के सरल तंत्र-मंत्र

ND

धन कमाने के लिए खास तांत्रिक प्रयोग प्रस्तुत है। इस प्रयोग को दीपावली के रात में किया जाता है। इस प्रयोग से किसी तरह की हानि नहीं होती। यह सभी साधारणजन के लिए असरकारी और आसान तांत्रिक प्रयोग है। 

इस सरल तांत्रिक प्रयोग को पूर्ण पवित्रता से करने पर लाभ अवश्य मिलता है। लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। धन की वर्षा होती है। रूका पैसा तो मिलता ही है आय के नए-नए साधन भी जुटने लगते हैं। सबसे पहले पूरी शुद्धता से नीचे दिए गए मंत्र की पहले 108 बार माला करें। 

महालक्ष्मी मंत्र - 
'ॐ श्रीं ह्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नम:' 

सरल वि‍धि : 
* चांदी की एक छोटी-सी डिबिया लें। अगर चांदी की उपलब्ध नहीं हो तो किसी और शुद्ध धातु की डिबिया भी आप ले सकते हैं। 

IFM
* इस डिबिया को आप ऊपर तक नागकेशर तथा शहद से भरकर बंद कर दें। 

* दीपावली की रात्रि को इसका पूजन-अर्चन करके इसे अपने लॉकर या दुकान के गल्ले में रख दीजिए। 

* रखने के बाद इसे खोलने की जरूरत नहीं है और ना ही और कुछ उपाय करने की। 

* फिर अगली दीपावली तक इसे लॉकर या गल्ले में रखी रहने दें। दिनों दिन बढ़ती लक्ष्मी का चमत्कार आप स्वयं देखेंगे।

Wednesday, 19 June 2013

Horror Stories in Hindi – कोई रोता है मेरे पास बैठकर


मैंने सुना तो था कि अगर रात के समय किसी सुनसान रास्ते पर आपको कोई आवाज सुनाई दे तो पीछे पलटकर नहीं देखना चाहिए. लेकिन जैसे आप इस बात पर विश्वास नहीं करते वैसे ही मुझे भी यह सब दकियानूसी लगता था. लेकिन शायद इन सब बातों पर विश्वास ना करना ही मेरे लिए एक बुरा सपना साबित हुआ. बस फर्क इतना है कि बुरे सपने नींद टूटने के बाद गायब हो जाते हैं लेकिन यह बुरा सपना तो अब तक मेरे साथ ही चल रहा है.


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मेरी बेस्ट फ्रेंड की शादी थी और हम सभी दोस्त उसकी शादी में जाने के लिए तैयार थे. नीतू और मेरी पहचान कॉलेज के समय हुई थी. वह उत्तरांचल के एक छोटे से गांव से संबंध रखती थी और पढ़ाई के सिलसिले में दिल्ली आई थी. नीतू का परिवार उत्तरांचल ही रहता था इसीलिए शादी तो वहीं होनी थी.


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खैर जॉब में व्यस्त होने के चलते हम में से कोई भी नीतू की शादी के लिए जल्दी नहीं जा पाया. शादी के दो दिन पहले ही हम सभी कॉलेज के दोस्तों ने एक मिनी बस की और शाम के समय ही निकल पड़े उत्तरांचल की तरफ. रात के करीब 10 बजे होंगे कि सभी को जोरों की भूख लगने लगी. रास्ते में कोई अच्छी जगह ना मिल पाने के कारण हमने थोड़ा और दूर जाकर खाने की सोची. 12 बजे के आसपास हमें एक जगह दिखाई दी जहां हम सभी खाने के लिए बैठ गए.


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खाना खाकर कुछ दूर चले ही थे कि हमारी बस खराब हो गई और वो भी ऐसी जगह पर जहां आसपास सिवाय अंधेरे के और कुछ नजर ही नहीं आ रहा था. मैं और मेरी एक दोस्त फोटोग्राफ्स खिंचवाने के लिए चल दिए. रात का समय था बाहर का ठंडा मौसम बहुत अच्छा था तो हमने सोचा एक जगह खड़े होने से बेहतर है आगे चला जाए, गाड़ी तो ठीक होने में समय लगेगा.


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मेरी दोस्त और मैं कुछ दूर ही चले थे लेकिन वहां इतना घना अंधेरा था कि हमें और पीछे का कुछ नजर ही नहीं आ रहा था. अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे कोई मुझे आवाज दे रहा है. पहले तो मुझे लगा मुझे गलतफहमी हुई है और हम दोनों फिर से फोटोग्राफ्स खिंचवाने में व्यस्त हो गए.


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लेकिन कुछ ही देर बाद मुझे ऐसा लगा कि फिर किसी ने मुझे मेरे कान में मेरा नाम पुकारा है. मैं पहले तो डरी लेकिन अपनी दोस्त को इस बारे में कुछ नहीं बताया.



लेकिन जैसे ही मैं आगे बढ़ी किसी ने बहुत तेज मेरा नाम पुकारा लेकिन जब मैंने अपनी दोस्त से पूछा कि उसने मेरा नाम सुना तो उसने मना कर दिया और यह भी कहा कि अगर तुझे सुनाई दे भी रहा है तो भी तुझे पीछे नहीं मुड़ना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से दुष्ट आत्माएं पीछे पड़ जाती हैं.


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मैंने उसकी बात को मजाक में टाल दिया और यह कहते हुए नकार दिया कि हो सकता है किसी को हमारी मदद की जरूरत हो !! मेरी दोस्त ने कहा कि "अच्छा, लेकिन जिसे मदद चाहिए उसे तेरा नाम कैसे पता? पता भी है तो मुझे क्यों नहीं आ रही उसकी आवाज?"


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मैंने फिर भी उसकी बात नहीं सुनी. जैसे ही मेरे कानों ने दोबारा मेरा नाम गूंजता हुआ सुना मैंने पलटकर देख लिया कि आखिर कौन मुझे पुकार रहा है.


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गलती कर दी मैंने, उस दिन के बाद तो जैसे मेरा जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया. आज भी बिना वजह कभी मेरे कपड़े अलमारी के बाहर गिरे होते हैं तो कभी मेरा कमरा इस तरह बिखरा होता है जैसे किसी ने मेरे कमरे के सामानों पर ही अपना क्रोध उतारा है. दिन को जब भी मैं सो कर उठती हूं तो मेरे चेहरे पर लकीरों के निशान पड़े होते हैं तो कभी रात के समय ऐसा लगता है जैसे कोई रो रहा है मेरे पास बैठकर.

जादू-टोना फेल हो जाता है इस एक चमत्कारी पौधे से

तंत्र शास्त्र में अनेक वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है जैसे- काली हल्दी, शंख, रत्न, बांदा, श्रीफल, एकाक्षी नारियल, कौड़ी आदि। इन सबका अलग-अलग महत्व व प्रयोग है। यह सब चमत्कारी वस्तुएं हैं।


ऐसा ही एक चमत्कारी पौधा है अफेद आक (आंकड़ा)। यह बहुत चमत्कारी पौधा है। यह सामान्य रूप से पाएं जाने वाले आक के पौधे से अलग होता है। इसका उपयोग की तांत्रिक क्रियाओं में किया जाता है। तांत्रिक प्रयोगों से बचने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। जिस घर में यह लगा होता है उस घर किसी भी प्रकार के तंत्र-मंत्र या जादू-टोने का असर नहीं होता है।


इस आक के पौधे से भी अधिक चमत्कारी है इससे निर्मित गणेश प्रतिमा। तंत्र शास्त्र में यह बताया गया है कि यदि सफेद आक से निर्मित गणेश प्रतिमा की विधिवत पूजा की जाए तो सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। यह गणेश प्रतिमा अद्भुत व चमत्कारी होता है। इसकी पूजा बहुत नियम और कायदों से करनी पड़ती है। नियम से पूजा ना होने पर इसका उचित लाभ नहीं मिल पाता है। इसलिए यदि आप चाहते हैं कि आपके घर में किसी तरह के तंत्र-मंत्र का असर ना हो तो ये पौधा घर में जरुर लगाएं। इसके अलावा सफेद आक की जड़ को भी तंत्र में बहुत उपयोगी माना जाता है।

Posted By :- Charanjit Jilowa